भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान

About AICRP on Arid Zone Fruits

अखिल भारतीय शुष्क क्षेत्रीय फल समन्वित अनुसंधान परियोजना
भा.कृ.अनु.प.-केन्‍द्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान, बीछवाल, बीकानेर- 334006

परियोजना का नाम - अखिल भारतीय शुष्‍क क्षेत्रीय फल समन्वित अनुसंधान परियोजना

संस्‍थापना वर्ष - 1976


परिचय - भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा सर्वप्रथम वर्ष 1976 में शुष्क क्षेत्रीय फलों में अनुसंधान का कार्य ‘‘भारत के शुष्क एवं अर्धशुष्क क्षेत्रों के कुछ चयनित फलों पर अनुसंधान‘‘ नामक योजना में एपीसेस वित्त पोषण के अंतर्गत आरंभ किया गया था । छठी पंचवर्षीय योजना के दौरान वर्ष 1978 में इस योजना को अखिल भारतीय फल विकास समन्वित परियोजना के प्रकोष्ठ-3 में समायोजित कर दिया गया। सातवी पंचवर्षीय योजना (1985-1990) के दौरान प्रकोष्ठ-3 को प्रगठित करते हुए ‘अखिल भारतीय शुष्क क्षेत्रीय फल समन्वित अनुसंधान परियोजना’ नाम से एक स्वतंत्र परियोजना का रूप दे दिया गया था। वर्तमान में इस परियोजना के सत्रह केन्द्र हैं जिनमें से राजस्थान में 4, महाराष्ट्र में 3, गुजरात और उत्तरप्रदेश में 2-2 तथा तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं मध्यप्रदेश में 1-1 केन्द्र स्थित है। परियोजना में वर्तमान में कुल मिलाकर 118 कार्मिक हैं जिनमें 38 वैज्ञानिक, 36 तकनीकी तथा 44 सहायक कर्मचारी कार्यरत है।

उद्देश्‍य - इस परियोजना का मुख्य उद्देश्‍य शुष्क क्षेत्रीय फलों का विशेषकर क्षेत्रीय आधार पर, गुणवत्तायुक्त उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी का विकास करना है। विस्तारित रूप में इस परियोजना के उद्देश्‍य इस प्रकार हैं।

  1. बेर, आंवला, खजूर, अनार, बेल, अंजीर, करौंदा, लसोड़ा, सीताफल, इमली इत्यादि शुष्क क्षेत्रीय फलों को उगाने की उपयुक्त और टिकाऊ प्रौद्योगिकी का विकास करना।
  2. शुष्क क्षेत्रीय फलों के लिए लागत प्रभावी रोग एवं कीट प्रबंधन का विकास करना।

परियोजना के केन्‍द्र

(अ) राज्‍यों के कृषि विश्‍वविद्यालयों में -

  1. क्षेत्रीय फल अनुसंधान केंद्र, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, अबोहर. 152 116 (पंजाब)
  2. बागवानी अनुसंधान केंद्र, एआईसीआरपी, शुष्क क्षेत्रीय फल डीसीएमएस भवन, कमलानगर - अनंतपुर. 515 001 (आंध्र प्रदेश)
  3. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, तमिलनाडू कृषि विश्‍वविद्ययालय, कोविलंगम् - 626 107 अरूप्पुकोट्टई. जिला विरुधुनगर (त.ना.)
  4. क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र, चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, बावल-123 501.रिवाड़ी (हरियाणा)
  5. खजूर अनुसंधान केन्द्र, एस. के. राज. कृषि विश्वविद्यालय, बीछवाल, बीकानेर-334 006 (राज.)
  6. बागवानी एवं वानिकी महाविद्यालय, नरेन्द्र देव कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज - 224229 फैजाबाद- (उ.प्र.)
  7. उद्यानविज्ञान विभाग, कृषि महाविद्यालय, एस.के.एन.कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर- 303 329- (जयपुर)
  8. खजूर अनुसंधान केंद्र (एसडीजीएयू), मुन्द्रा - 370 421 (कच्छ) गुजरात
  9. उद्यानविज्ञान विभाग, महात्मा फूले कृषि विद्यापीठ राहुरी - 413 722. अहमदनगर (महाराष्ट्र)
  10. उद्यान विज्ञान विभाग, उद्यान विज्ञान महाविद्यालय, सरदार दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय सरदारकृषिनगर- 385 506 -गुजरात
  11. एक्रिप (शुष्क क्षेत्रीय फल), अंजीर एवं सीताफल अनुसंधान केंद्र (एमपीकेयू), जाधववाडी. त. पुरण्डर जिला - पूणे (महाराष्ट्र)
  12. एक्रिप (शुष्क क्षेत्रीय फल), सीताफल अनुसंधान केंद्र (एमएयू) अम्बाजोगई -431 517 जिला - बीड (महाराष्ट्र)
  13. बागवानी विभाग, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय कृषि नगर, आधारतल जबलपुर- 482 004 (म.प्र.)
  14. उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, झालावाड़-326 001 (राजस्‍थान)

(ब) भाकृअनुप के संस्‍थानों में
  1. फल-फसल विभाग, भारतीय बागवानी अंनुसंधान संस्थान हेसरघट्टा लेक पोस्टस. बेंगलूरू. 560 089 (कर्नाटक)
  2. केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, रहमान खेड़ा-पोस्ट- काकोरी लखनऊ- 227107(उ.प्र.)
  3. केन्‍द्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान, बीछवाल, बीकानेर - 334006 (राजस्‍थान)

महत्वपूर्ण उपलब्धि

(I) अनुसंधान उपलब्धियॉं
  • अनार की फुले अरक्‍ता और भगवा किस्‍में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए सबसे उपयुक्‍त किस्‍में प्रतिपादित की गयी हैं।
  • आंवला किस्में एनए-7, चकैया, कंचन और एनए-6 समान रूप से सभी शुष्क क्षेत्र में सबसे बेहतर पायी गयी हैं।
  • खजूर उगाने वाले क्षेत्रों के लिए खजूर की हलावी, बरही और मेडजूल किस्मों को सबसे उपयुक्त पाया गया है।
  • सीताफल (शरीफा) किस्मों आईलैण्‍ड जैम, बुलॉक हार्ट और मैमथ को कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र राज्‍यों के लिए उपयुक्त बताया गया है। अरूप्‍पूकोट्टई केंद्र ने तमिलनाडु क्षेत्र के लिए सीताफल की नई किस्म एपीके (सीए) 1 जारी की है।
  • भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्‍थान, बेंगलूरू ने सीतफल की अर्का सहान किस्‍म जारी की है।
  • अंजीर में कोन्ड्रिया, पूना फिग और दिएना किस्मों को अंजीर उगाने वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
  • सीताफल (शरीफा) में गूटी (सॉफ्ट वुड कलम) बांधने की तकनीक में मानकीकरण किया गया है।
  • अनार में उच्च घनत्व पौध रोपण में 5 x 2.5 मीटर के फासले के लिए अनुशंसा की गई है।
  • जल प्रबंधन तकनीक के लिए स्‍वस्‍थाने (5% ढलान) जल संचयन और प्रत्‍येक दूसरे दिन बूंद-बूंद सिंचाई की अनुशंसा की गई है।
  • अधिकांश शुष्क फल फसलों में एन.पी.के. की खुराक का मानकीकरण किया गया है।
  • आंवला बाग में एनए-6 को एनए-7 फसल के लिए सबसे अच्छे परागण के रूप में माना गया है।
  • सीताफल (शरीफा) में एक समान और बेहतर आकार के फल के लिए हस्‍त परागण की अनुशंसा की है।
  • बेर, आंवला, अनार और खजूर में फसल कटाई से पूर्व और उपरांत के कार्यक्रम को मानकीकृत किया गया है। खजूर, बेर, अनार और आंवला के मूल्य संवर्धित उत्पादों और व्यंजनों की विधियों को भी मानकीकृत किया गया है।
  • सभी शुष्क फल फसलों के अधिकांश रोगों और कीटों के लिए रासायनिक और कल्‍चर कार्यों को मानकीकृत किया गया है।

(।।) प्रौद्योगिकी विकास

  • बेर में उच्च फलोत्‍पादन के लिए अरूप्‍पूकोट्टई केंद्र ने 8 x 8 मीटर की दूरी के फासले पर पौध रोपण की अनुशंसा तमिलनाडु क्षेत्र के लिए की है।
  • बेर में 5% सतह ढलान देकर वर्षा जल संचयन के द्वारा अधिक फल उपज प्राप्त करने के लिए सिफारिश की गई है।
  • बेर में गोला अत्‍यधिक शुष्क क्षेत्रों के लिए कैथली कुछ अधिक वर्षा वाले और उमरान को मध्यम शुष्क अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उपयुक्त पाया गया है।
  • अनार की फुले अरक्‍ता और भगवा किस्‍में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक (म.फू.कृ.वि., राहुरी और डॉ.वाईएसआरएयू, अनंतपुर), के लिए और जालौर सीडलैस एवं जोधपुर रेड (एसकेआरएयू, बीकानेर) राजस्थान के लिए सबसे उपयुक्‍त किस्‍में बताई गयी हैं।
  • आंवला किस्में एनए-7, चकैया, कंचन और एनए-6 समान रूप से सभी शुष्क क्षेत्र में सबसे बेहतर पायी गयी हैं।
  • खजूर उगाने वाले क्षेत्रों के लिए खजूर की हलावी, बरही और मेडजूल किस्मों को सबसे उपयुक्त पाया गया है।
  • सीताफल (शरीफा) किस्मों आईलैण्‍ड जैम, बुलॉक हार्ट और मैमथ को कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र राज्‍यों के लिए उपयुक्त बताया गया है। अरूप्‍पूकोट्टई केंद्र ने तमिलनाडु क्षेत्र के लिए सीताफल की नई किस्म एपीके (सीए) 1 जारी की है। अंजीर में कोन्ड्रिया, पूना फिग और दिएना किस्मों को अंजीर उगाने वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
  • भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्‍थान, बेंगलूरू ने सीताफल की कम बीज के साथ चिकना आवरण, मिठास और लुगदी का आकर्षक रंग की संकर किस्‍म अर्का सहान जारी की है। महा. फूले कृ. विद्यापीठ, राहुरी अनार की एक संकर किस्‍म 61 को मृदुला नाम से जारी किया है जिसमें दानों का रंग लाल, बहुत नरम दाने और अन्य वांछनीय गुण हैं।
  • फैजाबाद केन्‍द्र ने उत्तर प्रदेश में बेल की व्यावसायिक खेती के लिए 100 ग्राम नत्रजन, 50 ग्राम फॉस्‍फोरस तथा 50 ग्राम पोटाश प्रति वर्ष प्रति पौधा (800 ग्राम नत्र., 400 ग्राम फॉस्‍फोरस और 400 ग्राम पोटाश 8 साल पुराने पेड़ को) उर्वरक खुराक की सिफारिश की है।
  • अनार में छाल बेधक कीट पर प्रभावी नियत्रण के लिए प्रभावित पेड़ की छाल पर मोनोक्रोटोफॉस 36 डब्ल्यूएससी (0.08%), फेनवलेरेट (20 ईसी (0.04%), क्‍वि‍नालफॉस 25 ईसी (0.08%) जैसे कीटनाशकों में से किसी के छिड़काव की अनुशंसा की गयी है।
  • बेर में चूर्णी फफूंदी रोग के नियंत्रण हेतु रोग की शुरुआत के साथ डाइनोकेप या कार्बेन्‍डाजिम या ट्राइडोमोर्फ या थायोफिनेट मिथाइल (0.1%) या नम होने वाली सल्फर (0.2%) के 15-20 दिनों के अंतराल पर 2-4 छिड़काव प्रभावी पाए गए।
  • भारत के कच्छ क्षेत्र में खजूर की मेडजूल किस्‍म में विपणन योग्‍य छुआरे बनाने में खलाल चरण सबसे उपयुक्त पाया गया है।

(iii) विकसित किस्में / संकर प्रजातियां

iv) सफलतम तकनीकी
  • अनार की फुले अरक्‍ता और भगवा किस्‍में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लिए सबसे उपयुक्‍त किस्‍में प्रतिपादित की गयी हैं।
  • आंवला किस्में एनए-7, चकैया, कंचन और एनए-6 समान रूप से सभी शुष्क क्षेत्र में सबसे बेहतर पायी गयी हैं।
  • खजूर उगाने वाले क्षेत्रों के लिए खजूर की हलावी, बरही और मेडजूल किस्मों को सबसे उपयुक्त पाया गया है।
  • सीताफल (शरीफा) किस्मों आईलैण्‍ड जैम, बुलॉक हार्ट और मैमथ को कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र राज्‍यों के लिए उपयुक्त बताया गया है। अरूप्‍पूकोट्टई केंद्र ने तमिलनाडु क्षेत्र के लिए सीताफल की नई किस्म एपीके (सीए) 1 जारी की है।
  • अंजीर में कोन्ड्रिया, पूना फिग और दिएना किस्मों को अंजीर उगाने वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त बताया गया है।
  • भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्‍थान, बेंगलूरू ने सीतफल की अर्का सहान किस्‍म जारी की है।
  • सीताफल (शरीफा) में गूटी (सॉफ्ट वुड कलम) बांधने की तकनीक में मानकीकरण किया गया है।
  • अनार में उच्च घनत्व पौध रोपण में 5 x 2.5 मीटर के फासले के लिए अनुशंसा की गई है।
  • जल प्रबंधन तकनीक के लिए स्‍वस्‍थाने (5% ढलान) जल संचयन और प्रत्‍येक दूसरे दिन बूंद-बूंद सिंचाई की अनुशंसा की गई है।
  • अधिकांश शुष्क फल फसलों में एन.पी.के. की खुराक का मानकीकरण किया गया है।
  • आंवला बाग में एनए-6 को एनए-7 फसल के लिए सबसे अच्छे परागण के रूप में माना गया है।
  • सीताफल (शरीफा) में एक समान और बेहतर आकार के फल के लिए हस्‍त परागण की अनुशंसा की है।
  • बेर, आंवला, अनार और खजूर में फसल कटाई से पूर्व और उपरांत के कार्यक्रम को मानकीकृत किया गया है। खजूर, बेर, अनार और आंवला के मूल्य संवर्धित उत्पादों और व्यंजनों की विधियों को भी मानकीकृत किया गया है।
  • सभी शुष्क फल फसलों के अधिकांश रोगों और कीटों के लिए रासायनिक और कल्‍चर कार्यों को मानकीकृत किया गया है।
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