भाकृअनुप-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान

 
Valedictory Function 2024
Valedictory Function 2024
Valedictory Function 2024
Ber Day Celebration 2024
Ber Day Celebration 2024
winter school visit
IAS Visit
Laying Foundation Stone of Amrit Sarovar
CEERI Meeting
National Women Farmer's Day Celebration'
Visit of Trainees House
Laying Foundation Stone of Amrit Sarovar
farm visit with interaction
Soil less culture and vertical farming
parliament committee meeting photo
parliament committee meeting photo



नया :-बीज विक्रय सूचना


युवा पेशेवर प्रथम एवं द्वितीय (YP_I & II) हेतु तत्‍क्षण साक्षात्‍कार.


सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2023 का आयोजन 30-10-2023 से 05-11-2023 तक "भ्रष्टाचार को ना कहें, राष्ट्र के लिए प्रतिबद्ध" विषय पर किया जा रहा है। www.pledge.cvc.nic.in.


The institute will organise the winter school on “Technological interventions in potential arid horticultural crops for enhancing farmer’s income” from 30 January, 2024 to 19 February, 2024.
Click here to visit website. or Download Brochure


G20 logo 2023
Logo of Millet 2023
logo of Azadi di Amrit Mahotsav

Hindi karyasala

दिनांक 24.06.2022 को संस्थान में ‘मानसिक स्वास्‍थ्‍य’ विषय पर हिन्दी कार्यशाला का आयोजन ऑन लाइन एवं ऑफ लाईन माध्य्म से किया गया, जिसमें डॉ डी. एस. पूनिया, एम.डी (मनोचिकित्सक), एम्स नई दिल्ली एवं संस्थापक माइन्डरूट फाउन्‍डेशन, जयपुर ने मानसिक स्वास्थ्‍य के बारे में विस्तार से चर्चा की एवं लघु चलचित्र एवं पॉवर पाइन्ट प्रस्तुति के माध्‍यम से मानसिक स्वास्‍थ्‍य के बारे में बताया। इस चर्चा के दौरान प्रतिभागियों/ जिज्ञासियों द्वारा पूछे गये प्रश्नों का जवाब भी दिया एवं बताया की कैसे जाने की कोई व्‍यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्‍थ है एवं उसे उपचार की आवश्यकता है। उपरोक्त कार्यशाला में संस्थान, उपकेन्द्र एवं कृषि विज्ञान केन्द्र , गुजरात के सभी अधिकारी/कर्मचारी तथा बीकानेर में स्थिति भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भी भाग लिया। संस्थान के निदेशक डॉ. डी. के. समादिया ने सभी का स्वाभगत किया एवं कार्यशाला के विषय में बाताया। डॉ. धुरेन्द्रि सिंह, प्रधान वैज्ञानिक ने डॉ पूनिया एवं उनकी टीम के साथ सभी उपस्थिति अतिथियों, अधिकारी एवं कर्मचारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया।



संस्थान की राजभाषा पत्रिका ''मरु बागवाणी'' को गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्कार

संस्था।न की राजभाषा पत्रिका ''मरु बागवाणी'' को गणेश शंकर विद्यार्थी पुरस्का र भाकृअनुप.-केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर (राजस्थारन) की राजभाषा पत्रिका 'मरु बागवाणी' को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्लीं के द्वारा 'क' और ख'' क्षेत्रों में स्थित संस्थाानों की श्रेणी में दिया जाने वाला 'गणेश शंकर विद्यार्थी राजभाषा पत्रिका पुरस्का र (2018-19) का प्रथम पुरस्काार प्रदान किया गया है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो (डॉ.) पी.एल. सरोज ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के देश भर में फैले 114 संस्था्नों की हिंदी की उत्कृथष्टश पत्रिकाओं को प्रतिवर्ष यह पुरस्का्र दिया जाता है। वर्ष 2018-19 का यह प्रथम पुरस्काीर इस संस्थाेन की वार्षिक हिंदी पत्रिका 'मरु बागवाणी' को प्राप्त हुआ है। यह इस संस्थान एवं बीकानेर के लिए गौरव की बात है।


भाकअनुप-केन्‍द्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान में टिड्डी दल का हमला


एक तरफ जहां कोरोना की भयंकर महामारी से सभी प्रभावित है वहीं केन्‍द्रीय शुष्‍क बागवानी संस्‍थान, बीछवाल, बीकानेर के अनंसधान फार्म में आज दिनांक 20.05.2020 को लगभग 12:30 बजे एक बहुत बड़े टिड्डी दल ने दस्‍तक दी। यह टिड्डी दल लगभग एक घण्‍टे तक संस्‍थान परिसर में एवं शोध प्रक्षेत्र की विभिन्‍न फसलों पर मंडराता रहा है तथा कई फसलों जैसे ककड़ी, खेजड़ी अनार, किन्‍नों इत्‍यादि को नुकसान भी पहुंचाया। इस टिड्डी पर काबू पाने के लिए निदेशक महोदय के निर्देश में सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी कर्मचारियों व श्रमिकों की सहायता से काबू पाया गया। भविष्‍य में किसी भी प्रकार के नुकसान से बचने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

संस्थान के बारे में
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान - 1993 के बाद से बागवानी फल और सब्जी के अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में कार्य कर रहा है बार बार सूखे और चरम शुष्कता यहाँ आम घटनाएं हैं । औसत वर्षा 230 मिमी / वर्ष है । मई -जून माह गर्म (अधिकतम तापमान 42.9 0C और नियुनतम तापमान 29.6 0C) और दिसंबर -जनवरी माह में बहूत ठण्ड रहती हैं ( अधिकतम तापमान 23.70C और न्यूनतम तापमान मतलब 8.9 0C ) समसामयिक ठंढ भी जनवरी और फरवरी के दौरान अनुभव होता है । क्षेत्र की मिट्टी की उर्वरता और जल धारण क्षमता कम है।


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